Saturday, 11 November 2023

घर की सफाई के साथ अपने दूषित विचारों की भी सफाई जरूरी ;; गुड़िया झा


घर की सफाई के साथ अपने दूषित विचारों की भी सफाई जरूरी ;; गुड़िया झा

 साफ सफाई हमारे जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। 
लेकिन बात जब दीपावली की हो तो इसकी जागरूकता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। 
क्या हमने कभी सोचा है कि जीवन का सही आनंद लेने के लिए स्वच्छ मानसिकता भी उतना ही आवश्यक है। जिसका उपयोग हमारे जीवन में सिर्फ दीपावली ही नहीं, बल्कि हमेशा होती है और इससे हमारा केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी तेजी से प्रभाव पड़ता है और हम निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं। 
इस दीपावली के शुभ अवसर  पर सभी चीजों की सफाई के साथ अपने मन से दूषित विचारों की भी सफाई कर इसकी खुशियों को और भी ज्यादा बढ़ा सकते हैं।

1 क्रोध और लालच का त्याग।
छोटी छोटी बातों पर अनावश्यक क्रोध कर हम दूसरों का नहीं बल्कि अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं। जो चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं है उसके बारे में सोच कर परेशान होने से अच्छा है कि उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करें जो हमारे नियंत्रण में है। एक कहावत है कि आंधी और तूफान के शांत होने पर ही पता चलता है कि नुकसान कितना बड़ा हुआ है। 
अभी हमारे समाज और देश में भ्रष्टाचार काफी फैला हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण आत्मसंतोष की कमी है। हम इंसानों के जीवन में मूलभूत आवश्यकताएं जैसे-भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य। ये जरूरतें हमारी पूरी हो जाती हैं। इसके अलावा जो भी बेलगाम इच्छाएं हैं,जब इनकी पूर्ति नहीं होती है, तभी मन में लालच उत्पन्न होता है। बस यहीं से भ्रष्टाचार की जड़ें अपना पैर पसारना शुरू कर देती हैं। कहते हैं कि ईमानदारी से कमाने वालों के शौक भले ही पूरी न हों लेकिन नींद जरूर पूरी होती हैं।

2 समय और ऊर्जा का सही उपयोग।
ईश्वर ने सभी के लिए एक दिन के 24 घण्टे ही निर्धारित किये हैं। अब यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम अपने कीमती समय का उपयोग कैसे करते हैं?
इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि अनावश्यक इधर-उधर की बातों में उलझने की बजाय कुछ सामाजिक और रचनात्मक कार्यों की ओर ध्यान देकर अपने समय का सही उपयोग कर सकते हैं। 
ऊर्जा के साथ भी यही बात लागू होती है। हम अपनी ऊर्जा अनावश्यक कार्यों में लगाकर खुद को थका देते हैं। नतीजा यह होता है कि हमारी कीमती ऊर्जा जरूरी कार्यों के लिए भी नहीं बच पाती है। 
अपने कार्यों की एक सूची तैयार कर आगे कदम बढाएं। आज तक जितने भी व्यक्ति सफल हुए हैं,उन्होंने इन 24 घण्टों का सदुपयोग कर ही अपनी सफलता की कहानी लिखी है।

3 संगठन का जवाब नहीं।
अकेले कुछ भी सम्भव नहीं है। जब हमारे हाथों की उंगलियां भी एक साथ मिलती है तभी एक मुट्ठी भी बनती है। 
एक -दूसरे के सुख-दुख को अपना समझकर उसमें शामिल होना और मिलकर एक नये समाज और राष्ट्र का निर्माण करना ये अच्छे संगठन की निशानी है।
कुछ भी असंभव नहीं है। हमें अपनी सोच को बदलना होगा। हमने अपनी छोटी और संकीर्ण सोच के कारण ही खुद को एक छोटे से दायरे में सीमित कर लिया है। हम अपनी योग्यता और क्षमता को पहचान नहीं पाते हैं। हमारी एक पहल से बहुत बड़ी टीम का निर्माण हो सकता है।

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