Wednesday, 27 March 2024

अपने सपनों को भी दें एक ऊंची उड़ान : गुड़िया झा

अपने सपनों को भी दें एक ऊंची उड़ान : गुड़िया झा

ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं, मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है।
आमतौर पर देखा जाता है कि हम अपने जीवन में बहुत कुछ करना चाहते हैं, अपने सपनों को मन में संजोए रखते हैं। कई परिस्थितियों के कारण जब ये पूरे नहीं हो पाते हैं तो हमारे मन में एक अजीब सी निराशा उत्पन्न होती है। क्यों न इस निराशा को आशा में बदल कर फिर से जुट जाएं एक नई शुरूआत के लिए। बस जरूरत है हमें जागरूक होने की जो बहुत मुश्किल भी नहीं है।
1 जब जागो तभी सबेरा।
जब भी अवसर मिले पूरी तत्परता से अपने सपनों को पूरा करने के लिए कदम आगे बढ़ाएं। कभी भी अपने में ये भ्रम ना पालें कि इतने दिनों तक कुछ नहीं किया तो अब करके क्या फायदा। 
बस हमारे हौसले बुलंद होने चाहिए। मेहनत से किया गया कोई भी काम छोटा नहीं होता। घर की छत तक पहुंचने के लिए एक एक सीढ़ियों पर ही पहले चढ़ना होता है। ठीक उसी प्रकार बड़ी सफलता हासिल करने के लिए छोटी छोटी बाधाओं को पार करना ही होगा। खट्टे मीठे उतार चढ़ाव का भी अपना एक अलग ही मजा है।
2 अपनी योग्यता और क्षमता को पहचानें।
हर किसी की अपनी विशेष क्षमता होती है। अपने सपनों को नया आयाम देने के लिए सबसे पहले अपनी योग्यता और क्षमता को पहचानें। इससे हमें आगे बढ़ने के लिए रास्ते भी अपने आप ही मिल जायेंगे। 
भीड़ के पीछे अनावश्यक दौड़ने से अच्छा है कि अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें।  
क्योंकि भीड़ में अक्सर हम अपनें वजूद को खो देते हैं। अगर वहां भी कुछ सीखने को मिले तो उससे पीछे नहीं हटें ।
3 आलोचनाओं से घबराना कैसा।
अक्सर आलोचनाओं से हम घबरा जाते हैं। खुश रहें यह सोच कर कि कहीं तो हमारी चर्चा होती है। सबकी बातो को गंभीरता से सुने और अनावश्यक प्रतिक्रिया देने से बचें। इससे मन शांत रहता है। आलोचनाओं से भी अपनी कुछ कमियों को दूर कर नया सीखा जा सकता है। 
जो साधन हमारे पास मौजूद नहीं है उसके बारे में ज्यादा सोच कर समय बर्बाद करने से अच्छा है कि वर्तमान में जो हमारे पास है उसके दम पर आगे बढ़ें।

Wednesday, 20 March 2024

इतना ही लें थाली में व्यर्थ ना जाए नाली में : गुड़िया झा


इतना ही लें थाली में व्यर्थ ना जाए नाली में : गुड़िया झा

भोजन जितना हमारे लिए जरूरी है, उतना ही जरूरी है इसकी बर्बादी पर रोक लगाना। भोजन को बर्बाद करना बहुत आसान काम है। सोचने वाली बात यह है कि हमारे देश के अन्नदाता यानि किसान कितनी मेहनत से फसलों को उपजाते हैं। उसके बाद कई प्रक्रियाओं से होते हुए यह हमारी थाली तक पहुंचता है। देश की आबादी का एक हिस्सा गरीबी और भूख से बेहाल है। क्यों न हम इसकी बर्बादी पर रोक लगाकर इसकी उपयोगिता पर ध्यान दें। 
अपनी थाली में जब हम भोजन को छोड़ते हैं तो इससे केवल अन्न की बर्बादी नहीं होती है, बल्कि बहुत से पोषक तत्वों की बर्बादी भी होती है। अवशिष्ट भोजन से हानिकारक रसायन का भी उत्सर्जन होता है जो स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। 
थोड़ी सी सावधानी से हम अनाज की बर्बादी पर रोक लगा सकते हैं साथ ही बजट पर भी नजर रहेगी।
1 खरीददारी से पहले लिस्ट बनाएं।
कई बार घर में बिना चेक किए हम खरीददारी करने पहुंच जाते हैं और एक के साथ एक फ्री के जाल में फंस कर कई अनावश्यक सामानों की भी खरीददारी कर लेते हैं या बाहर निकलने के आलस्य में भी एक साथ बहुत से सामानों की खरीददारी हो जाती है। 
जिसका नतीजा यह होता है कि उपयोग में लाते समय अधिकांश हमारा ध्यान सामग्रियों से हट जाता है और ज्यादा दिनों तक उपयोग नहीं होने पर ये खराब भी हो जाते हैं। 
थोड़ी थोड़ी मात्रा में खरीददारी करने से इन सबके उपयोग में भी आसानी होती है और बाजारों में आए दिन इसके मूल्यों में उतार चढाव का भी आसानी से पता चलता है। 
खरीददारी करते समय सामानों के पैकेट पर एक्सपायरी डेट जरूर देख लें। 
2 बनाने से पहले सावधानी।
भोजन बनाने से पहले भी इसकी मात्रा पर ध्यान दिया जाए तो बनाने का मजा भी कुछ ज्यादा ही  बढ़ जाता है। खाना बनाने के समय  एक बार पहले  से मौजूद सब्जियों और फलों का उपयोग कर लें। 
बहुत अधिक मात्रा में एक बार में खाना बनाने से अच्छा है कि सदस्यों के संख्या को ध्यान में रखते हुए मात्रा का ध्यान रखा जाए। फिर भी अगर खाना बचा हो तो आसपास गरीबों में भी बांटने का ऑप्शन है। कई तरह के फूड बैंक्स शुरू हो चुके हैं जिनका काम ही होता है घर से खाना इकट्ठा करना और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना।
3 खाते समय सावधानी।
खाने के प्लेट में हम अपनी भूख से ज्यादा खाना लेते हैं जो कि गलत है। इससे खाने की बर्बादी की अधिक संभावना रहती है। खाना लेने से पहले थोड़ी मात्रा में  लें और खत्म होने के बाद जरूरत हो तो फिर से लें। 
अधिकांश शादी-पार्टीज में एक बार में बहुत ज्यादा चीजें सर्व करने के कारण ही ज्यादा खाने की बर्बादी होती है। वहां भी हमें सावधानी रखने की जरूरत है। क्योंकि इस एक दिन की शादी- पार्टीज के लिए कोई भी माता पिता जीवन भर कितनी कटौती करते हैं इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

समाजसेवी संदीप नागपाल को मातृ शोक

राची, झारखण्ड  | मार्च  | 20, 2024 :: 
रांची नागरिक समिति के सचिव झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ,पंजाबी हिंदू बिरादरी, छोटानागपुर पैसेंजर एसोसिएशन  के आजीवन सदस्य संत निरंकारी मंडल के प्रवक्ता संदीप नागपाल की माता और स्वर्गीय अशोक नागपाल की धर्मपत्नी ललिता नागपाल नश्वर शरीर त्याग कर अपनी निवास अर्पित एनक्लेव कांके रोड ब्रह्मलीन हो गई है ज्ञात होगी ललिता नागपाल संत निरंकारी मिशन से बचपन से जुड़ी हुई थी और गुरु की आदेशों पर उन्होंने अपना जीवन को उतारने का प्रयास किया स्वर्गीय ललिता नागपाल बहुत ही नम्र स्वभाव और आध्यात्मिक विचारधारा की थी और अध्यात्म उनके जीवन का महत्वपूर्ण अंग था वह हमेशा निरंकार परमात्मा का यशोगान अंतिम समय तक करती रही वह अपने पीछे दो पुत्र और भरा पूरा परिवार छोड़ गई
                                                            

Sunday, 17 March 2024

नई सृष्टि, सुखमय सृष्टि की रचना नयेसंकल्पों व विचारों से होती : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन

राची, झारखण्ड  | मार्च  | 17, 2024 :: 
 सत्पुरूष का सबसे बड़ा धन उनके श्रेष्ठ कर्म ही है। वे अपने सद्व्यवहार, विनम्रता
तथा परोपकारो से पुण्यलाभ प्राप्त करते रहते हैं। इसके फलस्वरूप उन्हें परमात्मा से अक्षय
सुख मिलता है। यह बातें यहाँ ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान चौधरी
बगान, हरमू रोड में व्यक्त किये। उन्होने कहा नई सृष्टि, सुखमय सृष्टि की रचना नये
संकल्पों व विचारों से होती है। नये विचार सृष्टि के रचयिता परमपिता परमात्मा से प्राप्त
होते हैं। आज मानव अनेक प्रकार के पुराने विचारों तथा समस्याओं से घिरा हुआ है तथा
स्वयं को कलह क्लेषों से घिरा हुआ पा रहा है। उसका यह क्लेष तभी दूर होगा जब वह
संसार के भले के लिये कुछ नया सोचेगा। नये संकल्प यदि सामाजिक हो तो समाज का
उत्थान होता है राजनीतिक हो तो शासन व्यवस्था का उत्थान होता है तथा आध्यात्मिक हो
तो मानव की आत्मा का उत्थान होता है। ब्रह्मा को नई सुष्टि का रचयिता कहा जाता है।
परमात्मा ्रह्मा, विष्णु तथा शंकर आदि देवताओं को सष्टि की स्थापना, पालना व पतित
सृष्टि के विनाश के लिए रचते हैं। ऐसी बात नहीं कि महाविनाश के बाद सभी बीजों के
नष्ट हो जाने से नया बीज प्राप्त करना मुश्किल है। मनुष्य आत्मा का शरीर अन्य
शरीरधारी मनुष्यों को पैदा करने वाला एक बीज है। महाविनाश के पश्चात् दैवी सम्प्रदाय
के थोड़े से लोग रहते हैं जो योग बल के द्वारा सृष्टि को बढ़ाते हैं। अपने ज्ञानयुक्त
संकल्पों से पिताश्री ब्रह्म्मा मानव के संस्कारों को श्रेष्ठ बनाते हैं। ब्रह्मा मुख से ईश्वरीय ज्ञान
सुनकर मानव का जीवन बदल जाता है। उसका जीवन संयमित और मर्यादित हो जाती
है। आज से पॉँच हजार वर्ष पहले हमारा देश स्वर्ग तुल्य था। सारी सृष्टि सतोप्रधान थी।
उसे ब्रह्मा द्वारा ही परमात्मा ने सुखदायी बनाया था। प्रत्येक कल्प के बाद नये सिरे से
सतयुग रचा जाता है। अभी वही समय पुनः चल रहा है।

Saturday, 16 March 2024

शिव बारात आयोजन समिति ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय का किया अभिनंदन



*पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मंदिर परिसर में प्रगति कार्यों का किया अवलोकन


रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकान्त सहाय शनिवार को पहाड़ी बाबा के दर्शन करने रांची के पहाड़ी मंदिर पहुंचे। जहां शिव बारात आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश साहू के नेतृत्व में समिति के सदस्यों ने श्री सहाय का अभिनंदन किया। बाबा की आरती के उपरान्त श्री सहाय ने मंदिर समिति के लोगों के साथ मंदिर के प्रगति कार्यों का अवलोकन किया।
मौके पर श्री सहाय ने कहा कि श्री शिव बारात आयोजन महासमिति का कार्य सराहनीय है।
 मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने महाशिवरात्रि के दिन पहाड़ी मंदिर को राज्य सरकार द्वारा संरक्षित किये जाने को लेकर अपनी बातें रखी थीं। इसके दूसरे दिन से ही पर्यटन विभाग के अधिकारी सर्वे के लिए मंदिर परिसर की जांच में लगे हैं। जल्द डीपीआर तैयार कर पहाड़ी मंदिर में रोपवे एवं अन्य सुविधाओं पर कार्य शुरु हो जाएगा। बुजुर्ग एवं शारीरिक अक्षम व्यक्ति भी रोपवे के लगने से पहाड़ी बाबा के दर्शन के लिए ऊपर गर्भ गृह तक जा सकेंगे।
मौके पर रांची पहाड़ी मंदिर विकास समिति के राकेश सिन्हा, दीपक लाल, अरुण वर्मा, बंटी शर्मा, रंजीत बिहारी प्रसाद, मेहुल प्रसाद, बादल सिंह, राम सिंह, सौरव लाल, मोनू शर्मा, शानू समेत कई लोग उपस्थित थे।

Friday, 15 March 2024

श्री श्याम सहारा परिवार का फागुन महोत्सव मे भजनों पर झूमे श्रद्धालु


*अलौकिक दरबार, हवन पूजन, इत्र व पुष्प वर्षा और छप्पन भोग में शामिल हुए सैंकड़ों भक्तगण

एचईसी आवासीय परिसर स्थित सेक्टर तीन में श्रीश्याम सहारा परिवार के तत्वावधान में फागुन महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर खाटू नरेश श्री श्याम का भव्य श्रृंगार किया गया। कार्यक्रम में अलौकिक दरबार, हवन पूजन, इत्र व पुष्प वर्षा, छप्पन भोग के साथ भजन संध्या व अखंड ज्योति का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। 
 फागुन महोत्सव में विशेष रूप से फरीदाबाद से पधारे प्रख्यात भजन गायक अंकित शर्मा अंश और उनकी टोली द्वारा भजन गंगा की प्रस्तुति ने श्याम भक्तों का मन मोह लिया। दिल्ली से पधारे कलाकार प्रियांशु शर्मा के गीत-संगीत पर भी श्रद्धालु खूब झूमे। 
 देर शाम तक भक्तगण भजन गंगा में गोते लगाते रहे। 
 महोत्सव के आयोजन में सिंटू सिंह, ओमप्रकाश देव शर्मा, अरविंद कुमार पाठक, अंकित पाठक (भगिना), पवन गुप्ता, रोहित, रजत, धर्मेंद्र महतो, हेमंत कुमार सिंह, राजकिशोर प्रसाद सहित श्री श्याम सहारा परिवार के अन्य श्याम भक्तों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 
महोत्सव में काफी संख्या में महिलाएं व पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। 
* फागुन महोत्सव में शामिल हुए सुबोधकांत सहाय

श्री श्याम सहारा परिवार, धुर्वा के सौजन्य से आयोजित फागुन महोत्सव में श्याम प्रेमी/श्याम भक्त पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी शामिल हुए।
उन्होंने समारोह के सफल व भव्य आयोजन के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया एवं शुभकामनाएं दी।
 इस अवसर पर श्री सहाय ने कहा कि ऐसे धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन सामाजिक नवनिर्माण में काफी सहायक होते हैं। भगवान के भक्तों/श्रद्धालुओं के लिए ईश्वर से निकटता का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

सुबोधकांत सहाय ने सामाजिक कार्यकर्ता हर्षवंत सिंह की माता के निधन पर जताया शोक


* परिजनों से मिलकर किया शोक संवेदना व्यक्त 

 
रांची। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने शहर के सर्वेश्वरी नगर, इटकी रोड (हेहल)  निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हर्षवंत सिंह की माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। 
 श्री सहाय ने शुक्रवार को हर्षवंत सिंह के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त किया। 
विदित हो कि श्री सिंह की माता का निधन एक पखवारे पूर्व हो गया था। विगत दिन उनका श्राद्धकर्म संपन्न हुआ। 
श्री सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के काफी नजदीकी रहे हैं।
 श्री सहाय ने दिवंगत की आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की।
 इस अवसर पर सुनील सिंह, रणजीत सिंह, राजीव कुमार सिंह, सोनू वर्मा सहित हर्षवंत के अन्य परिजन मौजूद थे।