Saturday, 6 July 2024

कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती : गुड़िया झा

कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती : गुड़िया झा

साहस एक ऐसा गुण है जिसे पवित्र धर्म पुस्तक गीता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का दैवीय गुण माना गया है। हम अपने सुरक्षित दायरे से बाहर निकल कर कार्य करने से डरते हैं। दिल कुछ कहता है और दिमाग कुछ और। हमें हारने का, रिश्ते छुटने का, जो हाथ में है उसे खोने का डर सताता है, यहां तक कि सही बात को किसी के सामने बोलने से भी हमें डर लगता है कि पता नहीं सामने वाला कहीं बुरा ना मान जाए। लेकिन सही बात सही नियत से कही जाए तो परिणाम भी बेहतर होते हैं।
1 शुरूआत करने में देर कैसी।
 जब हम भविष्य में होने वाले भयानक परिणामों के बारे में कल्पना शुरू करते हैं और यह हमारे लिए बहुत वास्तविक जैसा लगने लगता है। इस तरह से हम बेवजह डर के कारण  किसी भी तरह के कार्य करने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। 
दूसरी तरफ भयभीत होने के बावजूद लक्ष्य प्राप्ति में लगे रहना साहस है।  अगर हम यह मान लें कि 99.9 प्रतिशत डर हमारे भीतर की उपज है जिसे हमने ही बढ़ावा दे रखा है, तो हम उस डर से बाहर निकल सकते हैं।
एक बार जब हम यह महसूस करते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। यह सिर्फ हमारी कल्पना में हो रहा है और हम इन सबका मुकाबला कर उसे दूर कर सकते हैं।  आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले हमें अपने भीतर के डर को भी भगाना होगा। 
2 डरें नहीं बढ़ते रहें।
अपने जीवन में  बदलाव के लिए कुछ चुनौतियों का सामना करना भी जरूरी है। तभी तो हमें अपनी वास्तविक क्षमता का पता चलता है। क्योंकि डर के प्रभाव में हारकर बैठने के बजाय अपने मन को मजबूत कड़ी बनाते हुए आगे बढ़ें। क्योंकि इस जमीन पर डर कर छिपने की कोई जगह नहीं है। किसी की भी समय और परिस्थितियां हमेशा एक जैसी  नहीं होती हैं। अब क्या होगा यह सोचने की बजाय इससे अच्छा और कैसे कर सकते हैं इस पर ध्यान दिया जाए तो आगे के रास्ते भी मिलते हैं।  कई बार अगर असफलता हाथ भी लगी तो उससे सीखें कि आखिर कमी कहां रह गई। फिर से खड़े हों और चलते रहें।
3 अकेले चलने से घबराएं नहीं।
इस बात में कोई संदेह नहीं कि जब हम अपने कदम अकेले आगे बढ़ा रहे होते हैं तो घबराहट होती है। यही वह समय होता है जब हमारी परीक्षा होती है। इस परीक्षा में धैर्य रूपी जवाब के साथ संयमित हो कर चलते रहें। अगर सफलता छोटी भी मिली तो अनुभव की सीख उससे बड़ी मिलेगी।
दूसरों के जीवन से अपनी तुलना करने की भूल ना करें। हमारे पास जो भी है वह ईश्वर ने हमारे भले के लिए ही दिया है। जरा सोचें कि जब कोई छोटा बच्चा किसी भी ऐसी चीज के लिए जिद करता है जो उसके हित में नहीं है। फिर भी उसके माता पिता उसकी अनावश्यक जिद को पूरी नहीं करते हैं। तो फिर जिस ईश्वर ने हमें ये जीवन दिया है वो हमें गलत स्थिति नहीं दे सकता। अगर ऐसा है भी तो जरूर हमारे लिए भी उसमें  कुछ अच्छा ही होगा।

Thursday, 27 June 2024

यातना ना दें और यातना से बचें : गुड़िया झा

यातना ना दें और यातना से बचें : गुड़िया झा

यातना पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय दिवस हर साल 26 जून को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानवीय अत्याचारों के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। 
क्या होती है यातना। यह वर्तमान परिवेश में किसी को भी बताने की जरूरत नहीं होती है। मामूली रूप से किसी को भी डराया या धमकाया जाना भी घोर अपराध माना जाता है। 
सबसे पहले शुरूआत खुद से करें। किसी को भी प्रताड़ित करना गलत तो है ही, लेकिन उससे भी बड़ी गलती है उसे लंबे समय तक सहन कर चुप हो जाना। इससे सामने वाले कि हिम्मत ज्यादा बढ़ती जाती है। ऐसा किसी के भी साथ ना हो इसके लिए सबसे जरूरी यह है कि जब भी यह एहसास हो कि हमें किसी भी तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है, तो पहले शालीनता से समझाने की कोशिश करें, फिर जब बात ना बने तो सख्ती से पेश आएं। हमारा आत्मसम्मान ही सबसे बड़ी पूंजी है। इसी तरह दूसरे के आत्मसम्मान की रक्षा करना भी हमारी ही जिम्मेदारी है।
दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति को कानून के दायरे में रह कर अपने तरीके से जीवन जीने का अधिकार है। जब तक हम नहीं चाहेंगे, हमें कोई नहीं प्रताड़ित कर सकता है। 
यह सोच कर कभी हताश न हों कि हम अकेले हैं, बल्कि यह सोच कर डटें रहें कि हम अकेले ही काफी हैं। अगर आप गलत नहीं हैं तो पीछे हटने की जरूरत नहीं है और ना ही अपने मन में किसी भी तरह की हीन भावना लाने की जरूरत है। अनुभवी लोगों से सलाह अवश्य लें। अपनी सुरक्षा और अपने अधिकारों के लिए हर किसी को जागरूक रहने की जरूरत है। 
साथ में ध्यान यह भी रहे कि हमारी तरफ से भी किसी को प्रताड़ना का शिकार नहीं होना पड़े।
एक कहावत है कि किसी को दुख पहुंचाकर चाहे कितनी भी पूजा और हवन किया जाए, तो कोई फायदा नहीं। हमारे कारण किसी के भी चेहरे पर खुशी आये, तो असली पूजा यही है।

Saturday, 22 June 2024

खुद को बदलना है तो बदला लेना छोड़ें : गुड़िया झा



खुद को बदलना है तो बदला लेना छोड़ें :  गुड़िया झा

"छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी"।
मानव मन होता ही इतना चंचल है कि वो सबकुछ अपने तरीके से बदलना चाहता है। बदलते परिवेश में सामाजिक दायरा हो या अपने कार्यस्थल में रोजमर्रा की जिंदगी में भी नकारात्मकता आसपास ना हो, यह संभव ही नहीं है। इसके लिए हर समय परेशान रहने या अपना गुस्सा किसी निर्दोष पर निकालने से कोई फायदा भी नहीं है। इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि खुद ही अपने भीतर बदलाव लाकर खुश रहा जाए। क्योंकि हमें अपने कार्य के माध्यम से चैंपियन के रूप में चमकना है।
1 व्यस्त रहें, मस्त रहें और स्वस्थ रहें।
अगर हम अपने कार्यों में व्यस्त रहेंगे तो फिर हमारा ध्यान नकारात्मकता की तरफ नहीं जा सकता है। फिर भी किसी कारणवश ऐसी स्थिति से सामना करना ही पड़े तो माहौल को देखकर थोड़ा समझना की वास्तविकता क्या है, उसके बाद ही निर्णय लें। बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया देने से अपने समय और ऊर्जा दोनों को ही बर्बाद करना है।
यह भी सही है कि हर समय गलत पर चुप हो जाना सही नहीं।    
सीमित और शालीन तरीके से कहना भी जरूरी है।
बीती हुई बातों को ज्यादा लंबे समय तक अपने दिमाग में न रखें। जितनी जल्दी हो सके उसे अपने मन से बाहर निकालकर हम फ्रेश महसूस करते हैं। 
2 सेहत का ध्यान भी जरूरी।
लगातार काम की थकान या अनावश्यक सोच और चिंता हमारी सेहत को बिगाड़ भी सकती है। जिस बात से हमारा खुद का भला ना हो ऐसी बातों को अपने मन में पालकर क्या फायदा?
जान है तो जहान है। समय पर भोजन, भरपूर पानी का सेवन, व्यायाम, ध्यान, अच्छे दोस्तों का साथ, अपना मनपसंद संगीत सुनना, मूवी देखना, लिखना आदि ऐसे कार्य हैं जो हमें फालतू बातों से दूर रखती हैं। 
3 बदले की भावना से दूर रहें।
जीवन में कई ऐसे मोड़ भी आते हैं जब बिना कारण ही हमें तीखी आलोचनाओं का भी सामना  करना पड़ता है। इससे मन को बहुत आहत पहुंचती है। कई बार हम भूल भी जाते हैं, तो वहीं कई बातों को दिल से लगा बैठते हैं। 
इसके अनुकूल जब हम किसी के लिए भी अपने मन में बदले की भावना नहीं रखते हैं, तो बहुत ही सुकून महसूस होता है। यही सुकून हमें आगे कार्य करने के लिए भी प्रेरित करती है। हमारा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों ही बेहतर रहता है।

Thursday, 30 May 2024

"काल करै सो आज कर, आज करै सो अब" : गुड़िया झा

"काल करै सो आज कर, आज करै सो अब" : गुड़िया झा

दुनिया के छठे सबसे उद्यमी वॉरेन बफेट ने कहा है कि हमारी आदतों की जंजीरें तब तक ही मुश्किल लगती हैं जब तक कि हम उन्हें तोड़ने की कोशिश नहीं करते। हमारी आदतें हमारी उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को आबाद भी कर सकती हैं और बर्बाद भी। अपनी जो आदतें हम विकसित करते हैं उससे हम दिनोंदिन मजबूत होते हैं। हमारे कार्य करने का तरीका हमारी आदतों पर निर्भर करती है। कुछ आदतें हमारी कार्य की गति को आगे बढाती हैं तो वहीं कुछ आदतों से हम आगे बढ़ने की दिशा में कुछ पीछे भी हो जाते हैं।  अपनी तरफ से एक छोटी सी कोशिश तो बनती ही है।

1 टालने की आदत से बचें।
हम में से अधिकांश लोग मन से इतने कमजोर होते हैं कि आसान से कार्य को भी कल पर छोड़ देते हैं। हमारी इसी आदत से आने वाला प्रत्येक कल भी यूं ही खाली चला जाता है।
कई बार मन में होते हुए भी हम अपने विचारों में इतने उलझे हुए होते हैं कि दिमाग में एक अजीब सी हलचल होती रहती है जो हमें लगातार परेशान करती है। अंततः हम खुद से हार जाते हैं और हमारे सपने भी अचेतन मन में दब जाते हैं। इन सबसे कोई फायदा नहीं होने वाला है। 
 इसके अनुकूल अपने मन को मजबूत करते हुए क्षमताओं को पहचान कर कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दें। पहले दिन शुरूआत भले ही छोटी हो लेकिन आने वाले दिनों के लिए यह एक सीढ़ी की तरह कार्य करेगा। फिर अगले दिन भी यही प्रक्रिया रहने दें। कुछ ही दिनों में यह हमारी आदतों में शामिल हो जायेगा। 
सफलता कभी भी किसी को एक दिन में नहीं मिलती। यह हमारी हर एक दिन की कड़ी मेहनत का परिणाम धीरे- धीरे दिखता है 

2 समय की एहमियत ज्यादा महत्वपूर्ण।
ईश्वर ने इस धरती पर सभी के लिए एक दिन के 24 घण्टे ही निर्धारित किये हैं। अब यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम इन 24 घण्टे का उपयोग किस तरह से करते हैं। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि कड़ी मेहनत के बीच हमारे दिल और दिमाग को थोड़ा आराम और थोड़े से मनोरंजन की भी जरूरत होती है। बीच-बीच में सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेना भी अपनी आदतों में सुधार का अवसर प्रदान करता है।
जहां तक कार्यों की सूची की बात है तो कई बार हम उन कार्यों में भी अपनी ऊर्जा अनावश्यक रूप से खर्च करते हैं जहां उनकी जरूरत नहीं होती है। फिर हम कहते हैं कि हमारी मेहनत तो बेकार चली गई। 
जबकि अपने आवश्यक कार्यों की सूची पहले से तैयार कर उसके अनुसार कार्य करेंगे तो आवश्यक कार्यों में भी अपनी समय और ऊर्जा को लगाकर कार्यों को टालने की आदत से बचेंगे।

3 दृढ़ इच्छाशक्ति का होना भी जरूरी।
अपनी आदतों में सुधार के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति खुद हमारे भीतर की उपज है। हम स्वयं इसके मालिक भी हैं। जब यह हमारे साथ है तो कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती। अपने मन में यह विचार कर कि मुझे इस कार्य को अवश्य ही एक निर्धारित समय में पूरा करना है तो फिर इस सोच से ही अपने कार्यों को पूरा होते हुए देखते हैं।

Saturday, 25 May 2024

आर्यवीर वैदिक संस्कृति को आत्मसात करें: डॉ. कुंजदेव मनीषी

* गुरुकुल शांति आश्रम में प्रांतीय आर्य वीरदल व शांति आश्रम का संयुक्त तत्वाधान में युवा चरित्र निर्माण शिविर के छठा दिन
लोहरदगा:
आज बौद्धिक कक्षा में शिविरार्थियों को महाविद्यालय गुरुकुल आश्रम  आमसेना उड़ीसा के उपाचार्य डॉ. कुंजदेव मनीषीजी ने कहा कि आर्य का तात्पर्य श्रेष्ठ है, जो सदाचार, संयम का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। वही आर्यवीर है मैंने कहा कि हमें बाल हकीकत राय जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने शिविर में प्रतिदिन दिए जा रहे प्रशिक्षण को अपने जीवन में आत्मसात करें। 
 प्रशिक्षण में सेवा भारती के अध्यक्ष दीपक सर्राफ ने भी बच्चों  को श्रेष्ठ जीवन के लिए प्रेरित किए जबकि  इमरजेंसी केयर के उपाध्यक्ष जय प्रकाश शर्मा एवं सचिव देशराज गोयल ने रक्तदान के प्रति सभी को मार्गदर्शन का प्रेरित किए।
 कार्यक्रम को आर्य वीर दल के प्रांतीय प्रशिक्षक आशीष कुमार आर्य ने संचालन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य शरच्चन्द्र आर्य जी के निर्देशन में विशेष रूप से गणेश शास्त्री, डा प्रतिभा शास्त्री, पहलवान महादेव आर्य, अर्जुन आर्य, कृष्ण आर्य, आलोक आर्य, सुरेंद्र आर्य, योगेंद्र आर्य, सूरज कुजूर, रविंद्र दत्ता, खुशी, रीमा, एवं आर्य वीरदल परिवार के समस्त कार्यकर्ता बंधु आदि शामिल रहे।

आर्यवीर दल के युवा चरित्र निर्माण शिविर के समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे मंत्री रामेश्वर उरांव
लोहरदगा:
प्रांतीय आर्य वीर दल व शांति आश्रम का संयुक्त तत्वाधान में युवा चरित्र निर्माण शिविर का समापन 27 मई 2024 को संध्या 4 बजे से होगी। समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड सरकार के वित्त मंत्री सह स्थानीय विधायक रामेश्वर उरांव होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में लोहरदगा के वर्तमान सांसद सुदर्शन भगत, महाविद्यालय गुरुकुल आश्रम आमसेना (उड़ीसा) के उपाचार्य डॉ. कुंजदेव मनीषी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रांतीय सर संघ संचालक लाल सच्चिदानंद अग्रवाल, वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृपा प्रसाद सिंह, पतंजलि योग समिति के राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला संरक्षक शिव शंकर सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे।

Tuesday, 21 May 2024

Sun of Restraint: Anuvrat Leader Acharya Shri Mahashraman : Dr. Kusum Lunia


Sun of Restraint: Anuvrat Leader Acharya Shri Mahashraman : Dr. Kusum Lunia

Acharya Shri Mahashraman, a messiah of humanity and a true yogi, has dedicated his entire life to the welfare of the self, the public, the nation, and the world. For the past 50 years, he has been climbing the peaks of spiritual practice, upholding the Indian Rishi tradition. His life is entirely public, as he imparts daily discourses to millions of devotees, blesses thousands with his hands, and recites auspicious chants to hundreds. From 4 AM to 10 PM, his life, dedicated to self-upliftment and social welfare, has become a model for public betterment.

The President of India, Smt. Droupadi Murmu, herself acknowledges and salutes the rigorous efforts of Acharya Shri Mahashraman for humanity. Prime Minister Narendra Modi has praised him, stating that Acharya Mahashraman, an ideal yogi, is performing great work for national unity and harmony.

Indeed, the era's preeminent Acharya Shri Mahashraman has provided a new direction and vision to the times.

As the spiritual leader of the Anuvrat movement, Acharya Shri Mahashraman's discourses urge every Anuvrati worker to adopt a life of restraint and to engage in specific Anuvrat activities. During the Anuvrat Amrit Mahotsav year, his Anuvrat Yatra has created unparalleled history by benefitting countless people. Inspired by him, over one crore people have accepted de-addiction, and millions have embraced restraint and positivity as success mantras through Life Science and Anuvrat competitions. Thousands have adopted digital detox, practicing restraint with screens, mobiles, and media, thereby bringing happiness into their lives.

Acharya Mahashraman Ji, a great social reformer, pinnacle of restraint, and a carrier of the Rishi tradition, is the 11th head of the Jain Terapanth sect.

The illustrious life journey of this venerable ascetic of the Shraman culture began on Vaishakh Shukla Navami, Vikram Samvat 2019 (13 May 1962), in Sardarshahar, born to parents Jhumarmal Dugad and Nema Devi. The promising boy took monk initiation under Muni Shri Sumer Mal Ji "Ladnun" on Vaishakh Shukla Chaturdashi, Vikram Samvat 2031 (5 May 1974) in Sardarshahar.

The newly initiated monk exhibited stability in yoga, tolerance for hardship, and a deep interest in profound knowledge. 

Progressing through continuous practice of restraint and as an embodiment of alertness, he was appointed to private work by Anuvrat founder Acharya Shri Tulsi on 13 May 1981 and as a close associate to Yuvacharya Mahapragya on 16 February 1986. The astute Acharya Tulsi conferred the title "Mahashraman" on 9 September 1989, and Acharya Mahapragya granted him the title of "Yuvacharya" on 14 September 1997. Through the continuous development of virtues like truth, courage, and valor with discipline and vigilance, Acharya Mahashraman Ji's immensely influential personality was shaped.

After the sudden demise of Acharya Shri Mahapragya on Vaishakh Krishna Ekadashi, Vikram Samvat 2067 (9 May 2010), Acharya Shri Mahashraman Ji became the 11th head of Terapanth on Vaishakh Shukla Dashami, Vikram Samvat 2067 (23 May 2010). From his first address itself, his impressive administrative capabilities and unparalleled foresight in decision-making became evident. Positive impacts began to be seen within the community through timely changes in restraint promotion.

Acharya Mahashraman, the golden present of India, is the great coordinator of the organization, a repository of excellence, energy, and karmic strength. He tirelessly continues the laborious task of caring for every individual, family, village, city, metropolis, the Terapanth sect, and global humanity.

Acharya Mahashraman Ji is an ideal contemporary teacher who provides new direction to present-day India. The regular training classes for character souls conducted by him are a unique experiment. He is a distinguished writer whose writings connect directly with the hearts and minds of readers, bringing about a virtuous transformation in society through the stream of restraint flowing from his pen.

Acharya Mahashraman Ji, a proponent of women's upliftment, provides numerous opportunities for women's empowerment. It is through his special blessings that women like us get the chance to serve the community, society, and the nation.

The visionary leader of Jinshasan, a world-renowned guide, provides the armor of restraint to all humanity, contributing to world peace.

His profound wisdom and unique oratory skills inspire thousands to renounce intemperance, reform their lives, and create a golden future.

Acharya Mahashraman Ji, a modern-day Bhagirath, is performing unparalleled public welfare by inspiring the masses for self-welfare through the Anuvrat Ganga of morality, de-addiction, and goodwill.

On the 63rd birthday, 15th consecration day, and 51st golden initiation day of the world peace envoy, era-visionary, and era-creator Acharya Shri Mahashraman Ji, we offer our heartfelt salutations and best wishes, hoping that such a great soul continues to serve humanity and guide the community for ages, enlightening the entire creation.
Dr. Kusum Lunia
(Member of the Joint Advisory Committee of the Ministry of Science and Technology and Ministry of Earth Sciences, Government of India; Organization Secretary   of Anuvibha; National Coordinator of the Anushasta Abhivandana Ceremony)  
Contact: 9891947000

Monday, 20 May 2024

पर्यावरण और हमारा जीवन : गुड़िया झा

पर्यावरण और हमारा जीवन : गुड़िया झा

कहते हैं कि स्वच्छ पर्यावरण पृथ्वी का फेंफड़ा है। जितना जरूरी है खुद की देखभाल करना उतना ही जरूरी है पर्यावरण की भी देखभाल करना। क्योंकि हमारा अस्तित्व भी इसी से बचा हुआ है। बहुत ही छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपायों को अपनाकर हम इसकी सुरक्षा में एक छोटा सा योगदान तो दे ही सकते हैं। 

1 अधिक पौधरोपण करना और पानी की बर्बादी पर रोक।
 मैंअपने घर में भी मौजूद पौधों की देखभाल करती हूं और हरे पेड़ों की कटाई नहीं होने देती।

2.जल को बचाना भी हमारी प्राथमिकता में शामिल है। हर एक बूंद की एहमियत है। इसके लिए मैं अपने घर में भी खुद के साथ बच्चों को सभी तैयारी कर नल खोलने को कहती हूं। अगर किसी कारण से नल खराब हो और पानी गिर रहा हो तो जल्द ही उसे ठीक भी करवा लेती हूं। पहले से बचे हुए पानी को पौधों में डालती हूं। साथ ही वॉशिंग मशीन या जब हाथ से भी कपड़े धोती हूं तो डिटर्जेंट का इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में नहीं करती। क्योंकि इससे पानी की बर्बादी ज्यादा होती है और जब यह डिटर्जेंट वाला पानी किसी माध्यम से मिट्टी में पहुंचता है तो मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी समाप्त हो जाती है। 

3 पशु-पक्षियों की देखभाल और प्लास्टिक पर रोक। 
मैं नियमित रूप से अपने घर के छत पर चिड़ियों के लिए खाना और पानी जरूर रखती हूं। इससे मन को शांति तो बहुत मिलती है साथ ही पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। 
जब भी मैं बाहर जाती हूं तो कपड़े का बैग ही उपयोग में लाती हूं। प्लास्टिक सेहत के लिए भी ठीक नहीं है और यह मिट्टी में भी नहीं मिलता है। गलती से भी अगर जानवर इसे खाते हैं तो उन्हें भी नुकसान होता है।

4 बिजली और इंधन की बचत।
घर में जिन जगहों पर काम नहीं होता है वहां की लाइट बंद कर देती हूं। जब जरूरत होती है तभी जलाती हूं। 
इसी तरह किचन में भी सभी तैयारियां करने के बाद ही गैस जलाती हूं। साथ ही यह भी ध्यान रखती हूं कि सब्जियों के उपयोग में लाने वाले तेल या रिफाइन उबलने नहीं देती। क्योंकि इससे निकलने वाला धुंआ भी पर्यावरण को काफी प्रदूषित करता है।