Monday, 5 June 2023

बालासोर रेल दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण : बंधु तिर्की


 



राची, झारखण्ड  | जून  | 05, 2023 ::  पूर्व मंत्री एवं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि उड़ीसा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसके लिये जिम्मेदार दोषी तत्वों की पहचान कर उसे सख्त सजा दी जानी चाहिये. 
श्री तिर्की ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय दल को बालासोर में भेजकर झारखण्ड के पीड़ितों को राहत पहुँचाने का अभियान शुरू कर दिया है.
श्री तिर्की ने केंद्र सरकार विशेष रूप से, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से यह मांग की है कि बालासोर दुर्घटना को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक कर रेलवे सुरक्षा की समीक्षा करने के साथ ही आवश्यक कार्रवाई की जाये. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि, इस मामले पर सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाकर सरकार को सभी को विश्वास में लेना चाहिये.





मारवाड़ी युवा मंच राँची समर्पण शाखा ने लगाया निःशुल्क हैल्थ चेकअप कैम्प


राची, झारखण्ड  | जून  | 04, 2023 :: 
मारवाड़ी युवा मंच  राँची समर्पण शाखा ने निःशुल्क हैल्थ चेकअप कैम्प लगाया , यह कैम्प ऑक्सीजन पार्क मोराबादी में लगाया गया । 
शाखा अध्यक्ष स्वेता भाला ने कहा  जीवन में सबसे ज़रूरी काम अपने शरीर को स्वस्थ रखना होना चाहिए , अगर ख़ुद स्वस्थ रहेंगे तो ही हम दूसरो के लिए कुछ कर सकते है , उन्होंने कहा स्वस्थ फ़ैमिली ही हमारी असली जमापूँजी है , ये ध्यान में रखते हुए शाखा ने ये कैम्प लगाया । 
स्वस्थ प्रभारी कोमल झुनझुनवाला  एवं संयोजिका आशा सराफ़ ने पूरे कार्यक्रम को बहुत ही सुंदर तरीक़े से  लाइन अप किया । 
कैम्प में सुगर कोलेस्ट्रॉल हीमोग्लोबिन  THS  hb A1c एवं विटामिन डी का चेकअप किया गया । 
                  मीडिया प्रभारी सरिता बथवाल ने बताया कैम्प में 70 लोगो ने टेस्ट करवाये । 
मोके पर अध्यक्ष स्वेता भाला   पूर्व अध्यक्ष किरण खेतान  स्वस्थ प्रभारी कोमल झुनझुनावाला  आशा सराफ़ दीपिका मोतिका, निकिता जलन, आशा संतोलिया उपस्थित थी । 
                   
             
                     

Sunday, 4 June 2023

गुरुचरण महतो मेमोरियल अंडर-16 टी-20 क्रिकेट टूनामेंट :: सोनेट रांची ने सोनेट बुंडू को हराया





राची, झारखण्ड  | जून  | 04, 2023 :: बुंडू में खेली जा रही हैं गुरुचरण महतो मेमोरियल अंडर-16 टी-20 क्रिकेट टूनामेंट रविवार को सोनेट रांची ने सोनेट बुंडू को 74 रनों से हराया,सोनेट रांची पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट पर 235 रन बनाया जिसमें मिहिर ने 58 और यश ने 67 एवं रयान ने 22 रन बनाया जिसमें सोनेट बुंडू के तरफ से नीरज माझी ने 2 इसके लिया,दूसरी पारी खेलने उतरी सोनेट बुंडू के टीम में 20 ओवर में 161 रन बनाकर ऑलआउट हो गया जिसमें रमेश महतो ने 63 रन और हिमांशु ने 43 रन बनाया,जिसमें सोनेट रांची के तरफ से रयान ने 4 विकेट लिया एवं सिद्धार्थ ने 2 विकेट लिया।

Saturday, 3 June 2023

विश्व साइकिल दिवस : प्रकृति को प्रदूषण मुक्त और स्वास्थ्य प्रति जागरूकता अभियान




राँची, झारखण्ड  | जून  | 03, 2023 :: 
संत जेवियर कॉलेज रांची  के  *1/3 COY NCC*, *राष्ट्र सेवा योजना (एन.एस.एस) और रोटरेक्ट क्लब* ने  3 जून को *विश्व साइकिल दिवस* पर साइकिल रैली कार्यक्रम का आयोजन किया। एन.सी.सी ANO *लेफ्टिनेंट डॉक्टर प्रिया श्रीवास्तव* के संरक्षण में  कुल 60 प्रतिभागी पूरे जोश के साथ शामिल हुए ।प्रतिभागियों ने  संत जेवियर कॉलेज गेट से मोराबादी ग्राउंड तक 10 किलोमीटर का सफर तय किया  और लोगों को जागरूक किया। 

एनसीसी ANO लेफ्टिनेंट डॉक्टर. प्रिया श्रीवास्तव ने बताया कि 3 जून को दुनियाभर में विश्व साइकिल दिवस (World Bicycle Day) मनाया जाता है। इसका उद्देय साइकिल के महत्व को समझाते हुए स्वास्थ्य और पर्यावरण को होने वाले फायदों को लेकर जागरूक करना है। साइकिल चलाने से सेहत को कई फायदे होते हैं।इसे नियमित तौर पर चलाने से शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त रहता है। यह लोगों में स्फूर्ति का संचार करता है।विश्व साइकिल दिवस साइकिल को मानव प्रगति, उन्नति, स्थिरता, सामाजिक समावेश और शांति की संस्कृति के प्रतीक के रूप में मनाता है।

प्रकृति को लेकर एनसीसी कैडेट ने ऑक्सीजन पार्क* मोराबादी में प्रकृति को प्रदूषण मुक्त और स्वास्थ्य प्रति जागरूकता हेतू एक शानदार नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया।पूरे जोश और उत्साह के साथ सभी ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

Mission LiFE के तहत् "BICYCLOTHON (साईकिल रैली) का वन विभाग द्वारा आयोजन



राची, झारखण्ड  | जून  | 03, 2023 :: 
Mission LiFE  के तहत बीते एक माह से  चल रहे कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आज  मोरहाबादी की बापू कुटिया से   वन भवन सभागार तक वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से  साइकिल रैली का आयोजन किया गया। 
 विश्व साइकिल दिवस के  अवसर पर "साइकिल रैली  BICYCLOTHON"  के माध्यम से विभाग ने पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया गया। यह साइकिल रैली  श्री एल ख्यांगते, अपर मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखण्ड सरकार एवं डॉ० संजय श्रीवास्तव, भा०व०से० प्रधान मुख्य वन एवं वन बल प्रमुख झारखण्ड के नेतृत्व में मोरहाबादी मैदान के बापू की कुटिया से लगभग 12 कि०मी० की दूरी तय की।  
साइकिल रैली रातु रोड, हरमू रोड, बिरसा चौक होते हुए वन भवन परिसर, स्थित सभागार तक  गई। 
इस साइकिल रैली में स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थानों के सदस्य, कॉरपोरेट कंपनियों के प्रतिनिधि, वन विभाग के पदाधिकारी/कर्मचारी पुलिस तथा अर्धसैनिक बल के पदाधिकारी एवं जवान  के साथ करीब 1500 की संख्या में पुरुष स्त्री विद्यार्थी आदि शामिल हुए। 

इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को पर्यावरण  के प्रति जागरूक बनाना है और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाकर पर्यावरण को संतुलित रखना है।  
Mission LIFE का मुख्य थीम उर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक का बहिष्कार पेड़-पौधे आदि लगाते हुए जीवन में छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते हुए अपना योगदान देना है। इस रैली की समाप्ति पर पलाश सभागार में प्रतिभागियों को डॉक्टर संजय श्रीवास्तव, भारतीय वन सेवा के  प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, झारखण्ड के द्वारा एक-एक पौधा उपहार रूप प्रदान किया गया।

रेल हादसे को लेकर संदीप नागपाल ने संवेदना जताई



रांची,झारखण्ड | जून | 03, 2023 :: ओड़िशा के बालासोर जिले में बीती रात हुई ट्रेन दुर्घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए रांची नागरिक समिति के सचिव तथा दक्षिण पूर्व रेलवे के पूर्व डीआरयूसीसी सदस्य एवं एफजेसीसीआई रेलवे कमेटी के उप चेयरमैन संदीप नागपाल  इस घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई। नागपाल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जाँच की भी मांग की एवं भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो यह सुनिश्चित करने हेतु नागपाल ने रेल मंत्रालय से आग्रह किया

विकास की रोशनी से बहुत दूर मजबूर हैं आदिवासी : बंधु तिर्की


विकास की रोशनी से बहुत दूर मजबूर हैं आदिवासी : बंधु तिर्की

पलायन का दंश झेलते आदिवासी-मूलवासी. 
सरकार संवेदनशीलता नहीं बरती तो हम सभी अपने-आपको कभी क्षमा नहीं कर पायेंगे.

रांची 3 जून. पूर्व मंत्री एवं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि जिस जनजातीय समाज के लिए विशेष रूप से झारखण्ड का गठन किया गया था वह विकास की रोशनी से बहुत दूर हो चुका है और आवश्यकता इस बात की है कि सरकार अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जनजातीय आदिवासी समाज के समग्र राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक एवं रोजगार के क्षेत्र में उसके विकास की ओर अपना ध्यान केंद्रित करें. श्री तिर्की ने जोर दिया कि आदिवासियों से सम्बंधित महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यान्वित करने की जिम्मेदारी वैसे अधिकारियों को सौंपी जानी चाहिये जिनमें जनजातीय समाज से भावनात्मक लगाव है और वे वाकई में आदिवासियों का उत्थान चाहते हों.
श्री तिर्की ने इस बात पर रोष प्रकट किया कि, झारखण्ड गठन के बाद से ही अनेक अधिकारियों और नेताओं ने भी केवल अपने निजी स्वार्थ को सबसे ऊंचा स्थान देते हुए वैसे अनेक निर्णय लिये जो झारखण्ड के आदिवासियों के साथ ही पूरे झारखण्डी जनमानस और इस राज्य के खिलाफ थे. उन्होंने कहा कि, झारखण्ड की विशिष्ट आवश्यकतायें हैं जिसे नज़रअंदाज़ करना सभी के लिये आत्मघाती है.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि जल, जंगल और जमीन को सबसे अधिक ऊँचा स्थान देनेवाले झारखण्ड में जनजातीय समुदाय न केवल इन सबसे भावनात्मक एवं गहराई से जुड़ा है बल्कि वह संकोची भी है और अधिकारियों सहित अनेक नेताओं ने इस बात का भरपूर फायदा उठाया है. लेकिन किसी भी समाज को असीमित समय तक अंधेरे में नहीं रखा जा सकता. उन्होंने कहा कि झारखण्ड में आदिवासियों के ज़मीन का हित संरक्षित करने के लिये विशेष रूप से छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) एवं संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसएनपीटी) लागू तो है परन्तु अवांछित तत्वों द्वारा उसकी लगातार अवहेलना की जा रही है और झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि जिन आदिवासियों के लिए झारखण्ड का गठन किया गया, वही आज विकास की परिभाषा में न केवल हासिये पर चले गये हैं बल्कि अब उनकी सांस्कृतिक-सामाजिक पहचान पर भी खतरा है.
श्री तिर्की ने कहा कि, विशेष रूप से पेशा कानून और झारखण्ड में पाँचवी अनुसूची को प्रभावी स्वरुप में लागू करना उन सभी के लिये बहुत ज़्यादा जरूरी है जो दिन-रात आदिवासी हित और आदिवासियत की बातें करते हैं.
श्री तिर्की ने कहा कि आदिवासियों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिये यह आवश्यक है कि सरकार महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील अधिकारियों को इससे संबंधित जिम्मेदारी देकर ऑपरेशनल मोड में काम करे.
उन्होंने कहा कि, झारखण्ड में वर्तमान समय में 32 तरह की जनजातीय आबादी रहती है और आदिम जनजाति के अनेक समुदाय केवल उपेक्षा और अदूरदर्शिता के कारण विलुप्त होने के कगार पर हैं. उनके लिये सरकार द्वारा विशेष योजना तैयार करना बहुत जरूरी है.
श्री तिर्की ने कहा कि, झारखण्ड गठन के बाद सरकार के स्तर पर जरूरत के अनुरूप नयी योजनाओं की शुरुआत की जानी चाहिये थी लेकिन इस प्रदेश में तो वे योजनाएं भी पंगु साबित हुई है जो बहुत पहले से न केवल प्रदेश सरकार बल्कि केन्द्र सरकार के द्वारा भी लागू है लेकिन झारखण्ड में जमीनी स्तर पर वह पंगु साबित हुई है.
श्री तिर्की ने कहा कि, झारखण्ड के 15 अनुसूचित जिलों में वह जनजातीय उपयोजना (ट्राइबल सब प्लान या टीएसपी) लागू है जिसे कांग्रेस के शासनकाल में पांचवी पंचवर्षीय योजना के तहत 
1976 में लागू किया गया था और जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिये है जहाँ जनजातीय आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा है. इस योजनाके दायरे में झारखण्ड के 50 प्रतिशत से अधिक प्रखण्ड आते हैं लेकिन उन सभी प्रखंडों और जिलों में इस योजना का हाल बेहाल है.
उन्होंने कहा कि आज 43 साल बाद भी यदि टीएसपी के अनेक प्रावधान जमीनी स्तर पर लागू नहीं है तो यह न केवल दुर्भाग्य की बात है बल्कि इसी की पृष्ठभूमि में इस सवाल का जवाब भी छुपा है कि आज सभी संसाधनों के होते हुए भी झारखण्ड के लोग गरीबी और पिछड़ेपन में उपेक्षा के साथ अपना जीवन गुजारने को क्यों विवश हैं?
श्री तिर्की ने कहा कि, जनजातीय परिवारों का जीवन स्तर ऊँचा उठाने तथा उन्हें शिक्षा एवं उनकी कुशलता के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही उनके जीवन और जनजातीय समाज की विशेषताओं को कायम रखने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार ने अपनी योजनाएं तो चालू की हुई है लेकिन वह प्रभावी रूप में जमीनी स्तर पर लागू नहीं की जा रही है और यह सबसे अधिक तकलीफ की बात है. उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा किसी भी योजना के कार्यान्वयन में न केवल सचिवालय बल्कि जिला एवं प्रखण्ड स्तर पर भी भ्रष्टाचार, लापरवाही एवं उपेक्षा का भाव सबसे बड़ी बाधा है.
श्री तिर्की ने विशेष रूप से वनाधिकार अधिनियम की चर्चा करते हुए कहा कि अब तक ना तो अधिकारियों को इस अधिनियम के पूरी जानकारी है और ना ही वे इसे लागू करवाने के प्रति ही समर्पित हैं, साथ ही इसके परिणाम स्वरुप ग्रामीणों एवं वन क्षेत्र में रहनेवाले आदिवासियों के बीच जागरूकता को बढ़ाकर इस क़ानून का प्रचार-प्रसार भी नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक उदाहरण है और इन सबके कारण सरकार के सभी संकल्प धरे के धरे रह जाते हैं.
श्री तिर्की ने कहा कि, आज झारखण्ड में अनेक अधिकारियों के साथ ही अनेक नेता भी सुविधाभोगी, स्वार्थी और भ्रष्ट आचरण के शिकार हैं और गरीब आदिवासियों के सामने जैसी समस्याएँ और चुनौतियाँ खड़ी है उसे वह नहीं समझ रहे. साथ ही दुर्भाग्य की बात यह भी है कि वे लोग शासन-प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर पहुँच गये हैं जो झारखण्ड के वास्तविक दर्द से पूरी तरीके से अपरिचित हैं और उनमें इसके प्रति कोई भी दिलचस्पी या संवेदनशीलता नहीं बची थी कि वे आम लोगों के दुख-दर्द, तकलीफ को समझें और उसे दूर करने का प्रयास करें. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की बड़ी संख्या भूख से त्रस्त हैं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और रोजगार का अभाव है, परिणाम यह कि न केवल   दूरदराज के गाँव-देहात बल्कि शहर के आसपास रहनेवाले आदिवासी एवं मूलवासियों को भी पलायन का दंश झेलना पड़ रहा है. श्री तिर्की ने जोर देकर कहा कि जब आदिवासी समाज अपने जानमाल की रक्षा नहीं कर पा रहा है तो उससे अपनी सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान के प्रति जागरुक होने की अपेक्षा करना भी मूर्खता है.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि जनजातीय समाज के संदर्भ में जितनी भी योजनाएं राज्य में लागू है, उसका नियत अवधि में अपेक्षित परिणाम की प्राप्ति के लिये सरकार नियमित रूप से योजनाओं के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करें और इस संबंध में समय-समय पर आवश्यक दिशा निर्देश दे.
श्री तिर्की ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से अपील की है कि यदि सरकार ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देकर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाये तो आनेवाले समय में इसका खामियाजा न केवल पूरे झारखण्ड को भुगतना पड़ेगा बल्कि देश पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इस संपूर्ण कार्यप्रणाली के लिये हम अपने-आप को कभी भी क्षमा नहीं कर पायेंगे.